मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

दिल परिंदा !!


दिल परिंदा उड़ उड़ जाए, जाने फिर क्यों भागे रे
आँख गुलाबी-पंख फैलाये, राहें राहें जोड़े रे !

चौराहे पे आ खड़ा हो, पगला अब क्या सोचे रे
पा जाऊँगा हर सपना फिर से, जब किस्मत मुँह मोड़े रे !

अब क्या देखे पीछे मुड़ मुड़, जब बंधन सारे तोड़े रे
छोड़ घरौंदा अब उड़ चल, क्यों तिनका तिनका जोड़े रे !

 दिल परिंदा उड़ उड़ जाए, जाने फिर फिर भागे रे !!