मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

मेरी राहाँ




मेरी राहाँ नू रौशन करन वाले नूर भुज गए,
मेरी सांसां नू महकान वाले फुल झुक गए

तक तक वेखां मुंडेर ते बैके
आया न कोई संदेसा लैके
बन्ने बैठा, चबारे बैठा
दिन ते ढल्या,
रत दे सितारे वि लुक गए !!
मेरी राहाँ नू रौशन करन वाले नूर भुज गए,


सूरत नु तेरी दिल विच वसा के
वेखां मैं झाती पा के
सोंदे वेखां, जगदे वेखां
वेख वेख अखां दे हंजु सुक गए !!
मेरी राहाँ नू रौशन करन वाले नूर भुज गए,


बेकदरी हो गई प्यार दी मेरी
फिकर ना पई तैनू मेरी
झोलियाँ अड्ड अड्ड रब्बों मंगां
मेरी दुआवां दे असर मुक गए !!
मेरी राहाँ नू रौशन करन वाले नूर भुज गए,


देर ना कर फिर छेती आजा
चन्न वरगा मुखडा विखा जा
अग्गे मैं हां, पिच्छे साया
हुन ते सान्सा दे वि पैर रुक गए !!

मेरी राहाँ नू रौशन करन वाले नूर भुज गए,
मेरी सांसां नू महकान वाले फुल झुक गए















गुरुवार, 17 जुलाई 2014

आज फ़िर !!



फिर तुझ पे एक दाव लगा  रहा हूँ,
फिर तुझ से हारने को दिल चाहता है !

यह उम्मीद नहीं यकीं है मेरा
तू ही है जो मुझसे वफ़ा चाहता है !!

आँखें मेरी आंसू तेरे,
नींदे  मेरी ख्वाब तेरे
कौन है यह जो तुम्हे इतना चाहता है !

तन्हाई में तुम- महफ़िल में तुम,
यादों की बातों में तुम
यह आइना ही है जो अक्स चाहता है !

छुआ है जिसने दिल के अहसास को,
देखा है होठों की प्यास को
तू ही है वो जो रूह में उतारना चाहता है !


शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

प्रेम चुनरिया !!



प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं
मैं, प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं,
शरमाऊँ, घबराऊँ फिर भी
छुप छुप तोहे देखे जाऊं

प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं
मैं, प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं

नयनो कि भासा आवे ना
पिया मोहसे मिलने आवे ना,
राह देख देख बौराई मैं,
निंदिया अपनी खोवे जाऊं 

प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं
मैं, प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं 

पायल, चूड़ी कंगना खनके 
आयी मैं भी खूब सजके,
अब देखे के तब देखे सांवरिया 
सोच सोच मैं डूबी जाऊं 

प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं
मैं, प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं


सारा जग जब जान चुका
फिर तू न माने क्यों
हार गई मैं हार गई
अब तो बस मैं हारी जाऊं

प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं
मैं, प्रेम चुनरिया ओढ़े जाऊं




मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

दिल परिंदा !!


दिल परिंदा उड़ उड़ जाए, जाने फिर क्यों भागे रे
आँख गुलाबी-पंख फैलाये, राहें राहें जोड़े रे !

चौराहे पे आ खड़ा हो, पगला अब क्या सोचे रे
पा जाऊँगा हर सपना फिर से, जब किस्मत मुँह मोड़े रे !

अब क्या देखे पीछे मुड़ मुड़, जब बंधन सारे तोड़े रे
छोड़ घरौंदा अब उड़ चल, क्यों तिनका तिनका जोड़े रे !

 दिल परिंदा उड़ उड़ जाए, जाने फिर फिर भागे रे !!

शनिवार, 11 जनवरी 2014





इश्क़ कि जुबां अधूरी होती है

ये दास्तां भी कहाँ पूरी होती है। 

मरते हैं लोग यहाँ मोहबत करके,

ज़िंदा रह जाए तो दूरी होती है।