फिर तुझ पे एक दाव लगा रहा हूँ,
फिर तुझ से हारने को दिल चाहता है !
यह उम्मीद नहीं यकीं है मेरा
तू ही है जो मुझसे वफ़ा चाहता है !!
आँखें मेरी आंसू तेरे,
नींदे मेरी ख्वाब तेरे
कौन है यह जो तुम्हे इतना चाहता है !
तन्हाई में तुम- महफ़िल में तुम,
यादों की बातों में तुम
यह आइना ही है जो अक्स चाहता है !
छुआ है जिसने दिल के अहसास को,
देखा है होठों की प्यास को
तू ही है वो जो रूह में उतारना चाहता है !

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