रविवार, 17 जून 2018

हमको तुमसे प्यार नहीं




दिन ढलते ही, तुम ही तो याद आते हो,
बारिश की पहली बूँद में, तुम ही तो नहाते हो !
नींद के पहले सपने में तुम ही तो आते हो
फिर भी तुम कहते हो की... हमको तुमसे प्यार नहीं !!

खाली खाली शाम जिसे तलाशे,
पत्थर में भी आंखें जिसे तराशे !
तुम ही तो वो दिल जसे पुकारे,
फिर भी तुम कहते हो की... हमको तुमसे प्यार नहीं !!

कितने लम्हे बीत गए समझने में,
दिन रात बीत गए सुलझने में !
क्या खोया- क्या पाया इस रूठने मनाने में
फिर भी तुम कहते हो की... हमको तुमसे प्यार नहीं !!

कब वक़्त गुज़रा, कब उम्र गुज़री...याद नहीं,
कब तुम्हारी आंखों में डूबा... याद नहीं !
कैसे जिया कैसे साँसे ली.. याद नहीं
फिर भी तुम कहते हो की... हमको तुमसे प्यार नहीं !!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें