सोमवार, 9 अगस्त 2021

अब्बू आते होंगे अभी



दरवाज़ा खुला रहने दो अम्मी,

ब्बू आते होंगे अभी..

मेरे खिलौने, मेरी गुड़िया बिस्तर पर पड़ी है
अलमारी में इनको संभाल दूँ सभी

खाना बना लिया है, बिखरा घर संवार दिया है,
आज तो पहले से ही होम वर्क कर लिया है..
कहीं दस्तक न आ जाये अभी,

किस से लड़ी, किस से झगड़ी, कितना पढ़ी
कब अम्मी ने चोरी पकड़ी..
पूरे दिन में क्या किया..
अभी तो कुछ बताया भी नही

कैसे खेलूं तुम संग चोर सिपाही
किस से सुनूं परियों के किस्से
ना टॉफ़ी, ना चॉकलेट, ना आइसक्रीम..
कुछ ना आया मेरे हिस्से!

सपनों में पक्का आ जाना
एक छोटी लोरी सुना जाना
मैं शायद सो जाऊँ तभी
दरवाज़ा खुला रहने दो अम्मी,
अब्बू आते होंगे अभी..

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें