रविवार, 13 जनवरी 2013

रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ







दिन को रात, रात को दिन देख रहा हूँ
रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ

आँखों से पीता हूँ
कदम- ब- कदम संभल रहा हूँ
दिल में तेरी तस्वीर लिए
दर-ब-दर भटक रहा हूँ

लब खामोश हैं
दिल ग़ालिब है
इशारों से ही शायरी कर रहा हूँ
रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ
मय का नशा तुम
पैमाने का जाम तुम
रिन्दों से भी अब दोस्ती कर रहा हूँ
रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ

इश्क की इब्तेदा है
सुकून का अंत 
जान कर भी यह ख़ता कर रहा हूँ
रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ
दिन को रात, रात को दिन देख रहा हूँ
रफ्ता रफ्ता मैं भी मोहब्बत कर रहा हूँ 

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